July 22, 2026

नर्मदेश्वर शिवलिंग क्या है? धार्मिक महत्व, स्थापना विधि, लाभ और असली पहचान | Namdev Shivling Art Puratan

नर्मदेश्वर शिवलिंग क्या है?

नर्मदेश्वर शिवलिंग भगवान शिव का अत्यंत पवित्र और स्वयंभू स्वरूप माना जाता है। यह मध्य प्रदेश की पवित्र माँ नर्मदा नदी से प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाले विशेष पत्थरों से निर्मित होता है। वर्षों तक नदी की धारा में बहने के कारण इन शिवलिंगों का आकार प्राकृतिक रूप से शिवलिंग जैसा बन जाता है। इन्हें किसी मशीन या कृत्रिम प्रक्रिया से नहीं बनाया जाता, इसलिए इनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक माना जाता है।

सनातन धर्म में नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि जहाँ नर्मदेश्वर शिवलिंग की नियमित पूजा होती है, वहाँ सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास रहता है।

नर्मदेश्वर शिवलिंग का धार्मिक महत्व

शिव पुराण तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में नर्मदेश्वर शिवलिंग को अत्यंत शुभ और पूजनीय बताया गया है। माना जाता है कि माँ नर्मदा स्वयं भगवान शिव के आशीर्वाद से प्रकट हुई हैं, इसलिए नर्मदा से प्राप्त प्रत्येक शिवलिंग शिव स्वरूप माना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा करने से—

  • भगवान शिव एवं माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • व्यापार एवं नौकरी में उन्नति होती है।
  • मानसिक तनाव कम होता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

घर में नर्मदेश्वर शिवलिंग रखने के लाभ

यदि घर में विधि-विधान से नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की जाए तो अनेक शुभ फल प्राप्त होते हैं।

प्रमुख लाभ

✔ घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

✔ परिवार में प्रेम एवं सौहार्द बढ़ता है।

✔ आर्थिक स्थिति मजबूत होने में सहायता मिलती है।

✔ भगवान शिव की कृपा से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

✔ ग्रह दोष एवं वास्तु दोष के प्रभाव कम होने की मान्यता है।

✔ नियमित पूजा से मन शांत और एकाग्र रहता है।

असली नर्मदेश्वर शिवलिंग की पहचान कैसे करें?

आज बाजार में कई कृत्रिम शिवलिंग भी उपलब्ध हैं। इसलिए खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

पहचान के मुख्य बिंदु

  • प्राकृतिक बनावट होती है।
  • प्रत्येक शिवलिंग का रंग एवं डिज़ाइन अलग होता है।
  • सतह पर प्राकृतिक रेखाएँ दिखाई देती हैं।
  • पत्थर मजबूत एवं चिकना होता है।
  • वजन सामान्य पत्थरों की तुलना में अधिक महसूस होता है।
  • विश्वसनीय एवं अनुभवी विक्रेता से ही खरीदें।

नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना कब करें?

यद्यपि किसी भी शुभ दिन स्थापना की जा सकती है, फिर भी निम्न अवसर विशेष शुभ माने जाते हैं—

  • श्रावण (सावन) मास
  • महाशिवरात्रि
  • सोमवार
  • प्रदोष व्रत
  • गुरु पुष्य योग
  • अक्षय तृतीया

स्थापना की सरल विधि

  1. पूजा स्थान को साफ करें।
  2. शिवलिंग को जल एवं गंगाजल से स्नान कराएँ।
  3. स्वच्छ वस्त्र बिछाकर जलाधारी में स्थापित करें।
  4. बेलपत्र, धतूरा, भस्म, चंदन एवं पुष्प अर्पित करें।
  5. “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
  6. दीप एवं धूप से आरती करें।
  7. भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

प्रतिदिन पूजा कैसे करें?

प्रतिदिन सुबह—

  • स्वच्छ जल अर्पित करें।
  • यदि संभव हो तो दूध से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र चढ़ाएँ।
  • चंदन लगाएँ।
  • धूप-दीप करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

सोमवार एवं सावन मास में विशेष पूजा का महत्व माना जाता है।


घर के लिए कौन-सा आकार उपयुक्त है?

घरेलू पूजा के लिए सामान्यतः निम्न आकार लोकप्रिय हैं—

  • 1.5 इंच
  • 2 इंच
  • 3 इंच
  • 4 इंच
  • 5 इंच

यदि आप मंदिर या बड़े पूजा स्थल के लिए शिवलिंग स्थापित करना चाहते हैं तो बड़े आकार का चयन कर सकते हैं।

नर्मदेश्वर शिवलिंग खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  • विश्वसनीय विक्रेता से खरीदें।
  • प्राकृतिक पत्थर की पुष्टि करें।
  • उचित जलाधारी के साथ लें।
  • आकार अपनी पूजा आवश्यकता के अनुसार चुनें।
  • अच्छी फिनिश एवं गुणवत्ता देखें।

क्यों चुनें Namdev Shivling Art Puratan?

Namdev Shivling Art Puratan कई वर्षों से प्राकृतिक नर्मदेश्वर शिवलिंग एवं पारंपरिक शिव पूजन सामग्री उपलब्ध कराने के लिए समर्पित है। हमारे यहाँ प्रत्येक शिवलिंग गुणवत्ता, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक परंपरा को ध्यान में रखकर चयनित किया जाता है। ग्राहकों का विश्वास और संतुष्टि हमारी सबसे बड़ी पहचान है।

हम विभिन्न आकारों के नर्मदेश्वर शिवलिंग, संगमरमर जलाधारी, नंदी, पूजा सेट तथा मंदिर स्थापना के लिए विशेष संग्रह उपलब्ध कराते हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या नर्मदेश्वर शिवलिंग घर में रखा जा सकता है?

हाँ, उचित विधि से स्थापना और नियमित पूजा के साथ घर में रखा जा सकता है।

क्या प्रतिदिन दूध से अभिषेक करना आवश्यक है?

नहीं, केवल स्वच्छ जल से भी पूजा की जा सकती है। विशेष अवसरों पर पंचामृत या दूध से अभिषेक किया जा सकता है।

क्या नर्मदेश्वर शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ नर्मदा से प्राकृतिक रूप से प्राप्त नर्मदेश्वर शिवलिंग अत्यंत पवित्र माने जाते हैं।

कौन-सा आकार सबसे अधिक खरीदा जाता है?

घर के लिए 2 इंच, 3 इंच और 4 इंच के नर्मदेश्वर शिवलिंग सबसे अधिक लोकप्रिय हैं।

July 22, 2026

स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग (Swayambhu Narmadeshwar Shivling)

स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग (Swayambhu Narmadeshwar Shivling) का महत्व-

जैसा की हम सभी जानते है की माँ नर्मदा भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक है | जिसका हर कंकर शिवशंकर के रूप में पूजा जाता है शास्त्रों में भी प्राकृतिक शिवलिंग (नर्मदेश्वर शिवलिंग )पूजा का बहुत महत्व है। विशेष कर स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग (Swayambhu Narmadeshwar Shivling) पूजा से गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी है। ऐसे ही प्राकृतिक और स्वयंभू शिवलिंगों में प्रसिद्ध है- बाणलिंग(नर्मदेश्वर शिवलिंग)। यह पवित्र माँ नर्मदा नदी के किनारे पाया जाने वाला एक विशेष गुणों वाला पत्थर है बाणलिंग शिव का ही एक रूप माना जाता है।

माँ नर्मदा के वरदान के कारण यह शिवलिंग स्वयं ही नर्मदा में निर्मित होते है | क्युकी माँ नर्मदा को भगवान भोले नाथ का वरदान प्राप्त है की तुम्हारे तल के जितने भी कंकर है सभी शिवशंकर के रूप में पूजे जायेगे | यह शिवलिंग स्वयं माँ नर्मदा में निर्मित होते है इसलिए इन्हें हम स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग कहते है | जिन्हें किसी भी प्रकार की प्राणप्रतिष्ठा की आवश्यकता नही होती है इन्हे सीधे नर्मदा से निकाल कर घर या मंदिर में स्थापित कर सकते है माँ नर्मदा से निकलने वाले शिवलिंग अब पहले जैसे पूर्ण अंडाकार नही होते है |

क्युकी माँ नर्मदा में बांधो का निर्माण होने से नर्मदा का बहाव अब धीमी गति का हो गया है जिससे नर्मदा में बहने वाले पत्थरो पर पानी का कम घर्षण होता है जिससे पत्थर पूर्ण अंडाकार नही हो पाते | जिससे यह वेदी (जलधारी) पर पूर्ण रूप से सही स्थापित नही हो पाते इसलिए इन्हे शिवलिंग निर्माण करने वाले गाव के लोग नर्मदा से निकालकर मशीनों द्वारा तरास कर शिवलिंग का रूप देते है जिससे शिवलिंग वेदी पर सही तरीके से स्थापित हो जाते है |

स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग का वास्तविक अर्थ है जो शिवलिंग स्वयं अपने आप बना हो वह स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग कहलाता है|
यह शिवलिंग बहुत ही पवित्र और पावन बताये गये है जिनमे से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता रहता है जो हमारे आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखते है | स्वयम्भू नर्मदेश्वर शिवलिंग को हम घर या ऑफिस में स्थापित कर सकते है| जिससे भगवान भोले नाथ की कृपा सदैव हम पर बनी रहती है घर में स्वम्भू नर्मदेश्वर शिवलिंग (Swayambhu Narmadeshwar Shivling) की पूजा से सुख-समृद्धि के साथ-साथ बड़ी से बड़ी मुसीबत से भी सुरक्षा मिलती है|

अबर आप घर में पूजा के लिए स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग खरीदना चहते है तो आप कही से भी ऑनलाइन आर्डर के सक्ते हो|
Buy Online Swayambhu Narmadeshwar Shivling.

 

स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग को घर में स्थापित कराने के फायदे –

  1. स्वयंभू शिवलिंग को घर में स्थापित करने से तथा नित्य पूजा करने से सब प्रकार की सुख समृद्धि प्राप्त होती है। और भगवान शिव की कृपा से दुःख-दरिद्रता दूर होकर वैभव की प्राप्ति होती है।

  2. स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग पर रोज काला तिल अर्पण करने से शनि ग्रह की कृपा से सफलताएं मिलती हैं। इस शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करने पर गुणवान और भाग्यशाली पुत्र की प्राप्ति होती है। तथा सरसों का तेल अर्पण करने से शत्रु का नाश होता है।

  3. शिवलिंग पर नित्य खीर अर्पण करने से सफलताएं मिलती हैं, इस शिवलिंग पर बार-बार हाथ का स्पर्श करने से या हाथ में रखकर अधिक समय तक पूजा अर्चना करने से मनुष्य की शारीरिक शक्ति बढ़ती है।

  4. जो व्यक्ति पंचामृत से स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग को स्नान कराता है, उसका पुनर्जन्म नहीं होता।

  5. शिवलिंग के पूजन से आपके मन में शुद्ध भाव आते है, तथा आसपास की निराशाजनक स्थिति से छुटकारा मिलता है

  6. एकाग्रता में वृद्धि के लिए भी नर्मदेश्वर शिवलिंग की घर मे स्थापना की जाती है

  7. स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा अहंकार, तनाव ,क्रोध में कमी ओर परस्पर संबंधो में शांति, प्रेम और सामंजस्य स्थापित करने में लाभदायक है|
July 22, 2026

Shivling And Nandi Position At Home (घर में शिवलिंग और नंदी का स्तान)

Shivling And Nandi Position At Home (घर में शिवलिंग और नंदी का स्तान किस दिशा में होना चाहिए )

Shivling And Nandi Position Is More Important For Us.

इस संसार में लोग कई प्रकार के शिवलिंग को की पूजा करते हैं |
जैसे सोने का शिवलिंग, चांदी का शिवलिंग हीरा – पन्ना का शिवलिंग, स्फटिक का शिवलिंग और नर्मदा पत्थर का नर्मदेश्वर शिवलिंग।
इन सभी शिवलिंग को में सबसे श्रेष्ठ घर में पूजा के लिए नर्मदेश्वर शिवलिंग को माना गया है।
घर में नर्मदेश्वर शिवलिंग 1 इंच से लेकर 6 इंच तक का रखा जा सकता है।घर में केवल एक ही शिवलिंग रखना चाहिए।
घर के पूजा रूम में जब शिवलिंग रखते हैं तो यह ध्यान अवश्य रखें की शिवलिंग में जलाधारी का मुख उत्तर दिशा में होना चाहिए | ठीक उसी के सामने नंदी की स्थापना होनी चाहिए।
शिवलिंग और नंदी का स्थान आमने – शामने होना चाहिए | तबी शिव मंदिर फलदायक होता है |अधिकतम वास्तु शास्त्रों का कहना है कि घर में 2 इंच (हथेली के अंगूठे के आकार ) का शिवलिंग ही रखना चाहिए। 6 इंच से बड़ा शिवलिंग मंदिर में रखा जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों अधिकतम सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं इसलिए इन सभी शिवलिंग का मुख उत्तर दिशा में ही स्थित है। घर में केवल एक ही शिवलिंग रखना चाहिए एक से ज्यादा शिवलिंग रखना है | तो हमें दुसरे कमरे में रखहिना चाहिए |हालाकि लोग एक ही शिवलिंग रखते है और उसी का फल मिलता है|

In this world, people worship many types of Shivling like gold Shivling,

silver Shivling diamond-emerald Shivling, crystal Shivling and Narmada Shivalinga of Narmada stone. In all these Shivlings, Narmadeshwar Shivling has been considered for worship in the best house. Narmadeshwar Shivling can be kept in the house from 1 inch to 6 inches. Only one Shivling should be kept in the house. When keeping Shivling in the worship room of the house, then it must be kept in mind that the face of the Jaldhari in the Shivling should be in the north direction, Nandi should be established right in front of it. The place of Shivling and Nandi should be face to face.

Most Vastu Shastras say that Shivling of 2 inches (the size of the thumb of the palm) should be kept in the house. Shivling bigger than 6 inches is kept in the temple. The 12 Jyotirlingas attract maximum positive energy, so the face of all these Shivlings is located in the north direction.

Only one Shivling should be kept in the house, if we want to keep more than one Shivling, then we should keep it in another room.

July 22, 2026

नर्मदेश्वर शिवलिंग की महिमा

  • शिवलिंग से उत्तर दिशा में भी न बैठे। क्योंकि माना जाता है कि इस दिशा में भगवान शंकर का बायां अंग होता है, जो शक्तिरुपा देवी उमा का स्थान है।
  • जब भी आप घर में पूजा के दौरान शिवलिंग से पश्चिम दिशा की ओर नहीं बैठना चाहिए। क्योंकि वह भगवान शंकर की पीठ मानी जाती है। इसलिए पीछे से देवपूजा करना शुभ फल नहीं देती
  • शिवलिंग कहीं भी स्थापित किये जा रहे हों इनकी वेदी का मुख सदैव उत्तर दिशा की तरफ ही होना चाहिए.
  • सवेरे स्नान करके शिवलिंग को एक थाल में रखें.
  • मंदिरों में कितना भी बड़ा नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित किया जा सकता है किन्तु घरों में स्थापित शिवलिंग की ऊंचाई अधिकतम 6 इंच की ही होनी चाहिए
  • बेलपत्र और जल की धारा ऊपर से चढ़ाएं.
  • शिवलिंग के सामने हाँथ जोड़कर शिव जी के मंत्रों का जाप करें ॐ नमः शिवाय
  • नर्मदेश्वर शिवलिंग को घर में स्थापित करने और पूजा अर्चना से घर में शांति का वातावारण बना रहता है.

नर्मदेश्वर शिवलिंग की महिमा से तात्पर्य है नर्मदेश्वर शिवलिंग की व्याख्या करना है यह शिवलिंग माँ नर्मदा के तल से प्राप्त होते है जो अत्यंत अदभुत और चमत्कारी शिवलिंग माने जाते है |

क्युकी नर्मदेश्वर शिवलिंग ही एक ऐसा शिवलिंग है, जो निरंतर सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है | नर्मदेश्वेर शिवलिंग की पूजा करने से सभी देवताओ की पूजा हो जाती है | नर्मदेश्वेर शिवलिंग भगवान शिव का साक्षात् स्वरूप है |

भगवान भोले नाथ को प्रसन्न करने के लिए हम अनेक प्रकार के अभिषेक करते है|

परन्तु क्या आप जानते है, की भोले नाथ को प्रसन्न करने के लिए सबसे सरल व सीधा साधन माँ नर्मदा से प्राप्त नर्मदेश्वेर शिवलिंग है|

जिसकी पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव शम्भु जल्दी प्रसन्न होते है |

भक्तो की सभी मनोकामना पूर्ण करते है नर्मदेश्वर शिवलिंग भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद स्वरूप है| जो हमें नर्मदा नदी से प्राप्त होते है माँ नर्मदा के वरदान के कारण नर्मदा का हर कंकर शकर के रूप मे पूजा जाता है

नर्मदेश्वर शिवलिंग की पौराणिक कथा

प्राचीन काल में नर्मदा नदी ने जब गंगा नदी के समान होने के लिए निश्चय किया और ब्रह्मा जी की तपस्या करने लगी |
ब्रह्मा जी ही एक ऐसे देवता है जो वरदानो के लिए प्रसिद्ध है |
नर्मदा नदी ने बहुत वर्षों तक ब्रह्मा जी की तपस्या की जिससे ब्रह्माजी प्रसन्न हुए ।
प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने माँ नर्मदा को वर मांगने को कहा। नर्मदाजी ने कहा – ’ब्रह्मा जी! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे आप गंगाजी के समान पाप नाशिनी और मोक्षदायिनी कर दीजिए।’


ब्रह्माजी ने मुस्कराते हुए कहा – ’यदि कोई दूसरा देवता भगवान शिव की बराबरी कर सकता है , कोई दूसरा पुरुष भगवान विष्णु के समान हो बन सकता है |
कोई दूसरी नारी पार्वतीजी की समानता कर सकती है | कोई दूसरी नगरी काशीपुरी की बराबरी कर सके तो कोई दूसरी नदी भी गंगा के समान हो सकती है।’


ब्रह्माजी की यह बात सुनकर नर्मदा उनके वरदान का त्याग करके काशी चली गयीं और वहां पिलपिलातीर्थ में शिवलिंग की स्थापना करके तप करने लगीं।भगवान शंकर उनकी तपस्या से बहुत प्रसन्न हुए और वर मांगने के लिए कहा। नर्मदा ने कहा – ’भगवन्! तुच्छ वर मांगने से क्या लाभ? बस आपके चरणकमलों में मेरी भक्ति बनी रहे।’


नर्मदा की यह बात सुनकर भगवान शंकर बहुत प्रसन्न हो गए और बोले – ’नर्मदे! तुम्हारे तट पर जितने भी कंकड़ – पत्थर हैं, वे सब मेरे वर से शिवलिंगरूप का रूप धारण कर लेगे |


जिनको सभी नर्मदेश्वर शिवलिंग के नाम से जानेगे तथा इन नर्मदेश्वर शिवलिंग को किसी भी प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नही होगी |
क्युकी यह मेरे वर के कारण स्वयं ही शिवलिंग का रूप धारण कर लेगे जिससे यह स्वयंभू शिवलिंग के नाम से भी जाने जायेगे ।

भोलेनाथ ने एक वर माँ नर्मदा को यह भी दिया की गंगा में स्नान करने पर शीघ्र ही पाप का नाश होता है | यमुना सात दिन के स्नान से और सरस्वती तीन दिन के स्नान से सब पापों का नाश करती हैं परन्तु तुम दर्शनमात्र से सम्पूर्ण पापों का निवारण करने वाली होगी।
तुमने जो नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की है, वह पुण्य और मोक्ष देने वाला होगा।’भगवान शंकर उसी लिंग में लीन हो गए।
इतनी पवित्रता पाकर नर्मदा भी प्रसन्न हो गयीं। इसलिए कहा जाता है ‘नर्मदा का हर कंकर शंकर है।’

नर्मदेश्वर शिवलिंग की महिमा –

शास्त्रों के अनुसार हजारो मिटटी के शिवलिंग की पूजा करने से जो पूण्य मिलता है वही पूण्य नर्मदेश्वेर शिवलिंग के दर्शन से मात्र से प्राप्त हो जाता है |
नर्मदेश्वेर शिवलिंग को घर में स्थापित करने वाले को सभी सुखो की प्राप्ति होती है तथा परिवार में सुख-शांति का वातावरण रहता है| नर्मदेश्वेर शिवलिंग जिस भी घर में रहता है

उस घर पर भगवान भोले नाथ की कृपा दृष्टि सदैव बनी रहती है |
नर्मदेश्वर शिवलिंग नर्मदा के तल से निकले पत्थरों के बने होते है |
नर्मदा नदी के तेज बहाव तथा भगवान भोलेनाथ वरदान के कारण बड़े-बड़े पत्थर आपस में टकरा- टकरा के एक अंडकार रूप शिवलिंग के जैसी आकृति ले लेते है | जो अत्यंत पवित्र माने गये है|

यह शिवलिंग अनेक आकर-प्रकार की आकृतिया लिए हुए होते ही जिनको मशीनों द्वारा तरसाने पर उनमे आकृतिया उभरती है |
जैसे ॐ आकर की आकृति ,तिलक , जनेऊ, त्रिसुल , अर्द्वनारेश्वर रूप आदि प्रकार की आकृतिया उभरी हुयी देखने को मिलती है |
जिसमे ॐ आकार की आकृति बहुत दुर्लभ होती है |

नर्मदेश्वर शिवलिंग का उल्लेख पुरानो में भी किया गया है नर्मदा नदी का कण-कण बहुत ही पवित्र बताया गया है। इस वजह से इस नदी से निकलने वाले शिवलिंग सबसे ज्यादा पवित्र माने जाते हैं।

नर्मदेश्वर शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि वह हमें कई तरह के भय से बचाता है। कहते हैं कि जंहा नर्मदेश्वर शिवलिंग का वास रहता है वह काल और यम का भय नही रहता है।

शिव पूजा में शिवलिंग की महत्ता को देखते हुए इसे घर और मंदिर दोनों जगहों पर स्थापित किया जाता है। इसे इन दोनों जगहों पर स्थापित करने के अलग-अलग नियम हैं। इसमें सबसे सामान्य सी बात यह है कि शिवलिंग की वेदी का मुख उत्तर दिशा में होना चाहिए। कहा जाता है कि नर्मदेश्वर शिवलिंग की आराधना से भक्तो पर भगवान भोलेनाथ की कृपा बरसती है। नर्मदेश्वर शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय उसमें बेलपत्र भी शामिल करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान भोले नाथ सैदेव प्रसन्न रहते हैं।

 

नर्मदेश्वर शिवलिंग की पहचान कैसे करे

नर्मदेश्वर शिवलिंग माँ नर्मदा से प्राप्त होता है| इसलिए यह नर्मदेश्वर शिवलिंग आपको विभिन्न कलर , साइज़ और विभिन्न प्रकार की आकृतियों में मिल जाता है| नर्मदेश्वर शिवलिंग को आप ऑनलाइन namdevshivlingart.com और ऑफलाइन कही से भी खरीद सकते है|
आप किस भी प्रकार का नर्मदेश्वर शिवलिंग खरीद सकते है क्युकि माँ नर्मदा के सभी पत्थर एक समान है| क्युकी माँ नर्मदा के सभी पत्थरो को भगवान शिव का ही रूप माना जाता है जो हमारी सभी समस्यों को का निवारण कर देता है|

इसलिए नर्मदेश्वर शिवलिंग की पहचान करना थोडा मुश्किल काम होता है | और अगर सच्चे मन से और पुरी आस्था से पूजा करे तो ,नर्मदेश्वर शिवलिंग के रूप में भगवान शिव की कृपा द्रष्टि हमेशा हम पर और हमारे परिवार पर बनी रहती है


घर में नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना कैसे करे –


  • वैसे तो नर्मदेश्वर शिवलिंग को भगवान शंकर के आशीर्वाद से स्वयंभू माना गया है |
    अर्थात ये पहले से सिद्ध होते हैं और इनकी स्थापना बिना किसी प्राण प्रतिष्ठा के भी की जा सकती है अगर आप घर में शिवलिंग की स्थापना करने के बारे में सोच रहे है तो | आपको कुछ बातो का ध्यान रखना चाहिए , इसलिए आपको पूजा करते वक़्त कोई ऐसा काम नी करना चाहिए |
    जिसे से भगवान शिव आप की पूजा से रूष्ट हो | हमें हमेशा शिवलिंग की पूजा बढ़ी आस्था और विश्वाश के साथ करना चाहिए , क्युकि ये पूजा बहुत ही फलदायी होती है, जो की आपके जन्म जन्मांतर के पापो का नाश कर देती है |जिस से आप पर भगवान शिव हमेशा प्रसन्न रहे और आपकी सभी मनोकामनाये जल्दी से जल्दी पूरी हो सके| शिवलिंग की पूजा, एक ऐसी पूजा है जिस से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न हो जाते है |

    शिवलिंग से उत्तर दिशा में भी न बैठे। क्योंकि माना जाता है कि इस दिशा में भगवान शंकर का बायां अंग होता है, जो शक्तिरुपा देवी उमा का स्थान है।

  • जब भी आप घर में पूजा के दौरान शिवलिंग से पश्चिम दिशा की ओर नहीं बैठना चाहिए। क्योंकि वह भगवान शंकर की पीठ मानी जाती है। इसलिए पीछे से देवपूजा करना शुभ फल नहीं देती

  • शिवलिंग कहीं भी स्थापित किये जा रहे हों इनकी वेदी का मुख सदैव उत्तर दिशा की तरफ ही होना चाहिए.

  • सवेरे स्नान करके शिवलिंग को एक थाल में रखें.

  • मंदिरों में कितना भी बड़ा नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित किया जा सकता है किन्तु घरों में स्थापित शिवलिंग की ऊंचाई अधिकतम 6 इंच की ही होनी चाहिए

  • बेलपत्र और जल की धारा ऊपर से चढ़ाएं.

  • शिवलिंग के सामने हाँथ जोड़कर शिव जी के मंत्रों का जाप करें ॐ नमः शिवाय

  • नर्मदेश्वर शिवलिंग को घर में स्थापित करने और पूजा अर्चना से घर में शांति का वातावारण बना रहता है.

Search for products (0)

Back to Top
Product has been added to your cart
Compare (0)